मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

विज्ञापन की महिमा जहाँ जेब से पैसे खेंचे जाते है


पुराना सामान भी नये पैक दिखाकर बेंचे जाते है
विज्ञापन की महिमा जहाँ जेब से पैसे खेंचे जाते है

सेल का पर्चा देख ग्राहक तो भीड़ से उमड़े जाते हैं
छूट का काँटा डाल ग्राहक मछली से पकड़े जाते है

ऑफर का लालच देकर माल गैरजरूरी बेंचे जाते है
ये बाज़ार की दुनियाँ जहाँ जेब से पैसे खेंचे जाते हैं

मुफ्त उपहारों के बडे सपने आँखों मे सेचें जाते है
मुफ्त के नाम पर छिपे रूप से पैसे खेंचे जाते है

जहाँ ग्राहक सिर्फ पैमेंट पाने तक ही पूजे जाते है
विज्ञापन की महिमा जहाँ जेब से पैसे खेंचे जाते है

सुरेश राय 'सरल'

(चित्र गूगल से साभार )

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा - बुधवार - 09/10/2013 को कहानी: माँ की शक्ति - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः32 पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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    1. बहुत बहुत धन्यवाद दर्शन जी ।

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  2. आदरणीय प्रसाद जी । उत्साहवर्धन हेतु मैं आपका आभार व्यक्त करता हूँ । आशीष बनाए रखें

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  3. जहाँ ग्राहक सिर्फ पैमेंट पाने तक ही पूजे जाते है
    विज्ञापन की महिमा जहाँ जेब से पैसे खेंचे जाते है
    .............सटीक अभिव्यक्ति सुरेश जी
    बहुत खूबसूरत ब्लॉग मिल गया, ढूँढने निकले थे। अब तो आते जाते रहेंगे।

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  4. विषय विचारणीय है। इस विषय पर तो एक अच्‍छा खासा अर्थमूलक आलेख लिखा जा सकता है।

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