शनिवार, 5 अक्तूबर 2013

बिना माँ के साये बेनूर ये धरा रहे


तेरा एहसास मन मे सदा हरा रहे
स्मृतियों से तेरी जीवन ये भरा रहे
जन्नत से कम नहीं है आँचल तेरा
माँ के साये बिना बेनूर ये धरा रहे
सुरेश राय 'सरल'


(चित्र गूगल से साभार )

7 टिप्‍पणियां:

  1. उत्तर
    1. आदरणीय नीरज कुमार जी, सह्रदय आभार व्यक्त करता हूं आपका. हार्दिक अभिनंदन

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  2. सही कहा..माँ के बगैर दुनिया की कल्पना ही रोंगटे खड़े कर देने वाली है...उत्तम प्रस्तुति।।।

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  3. वाह ... कृपा माँ की बनी रहे तो जीं में कुछ कमी नहीं रहती ...

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद नासवा जी .
      “माँ है तो जहाँ है “

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