मंगलवार, 29 अक्तूबर 2013

अंधेरे रिश्तों से मिटाओ तो बात बने


अंधेरे रिश्तों से मिटाओ तो बात बने
रोशनी दिलों तक फैलाओ तो बात बने
यहाँ तेल और बाती से न होगा उजाला
दिये मे अना को जलाओ तो बात बने
सुरेश राय 'सरल'

(चित्र गूगल से साभार )

9 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ... दिए में अब आना को जलाने की जरूरत है ... रिश्तों में ताजगी लाने की जरूरत है ..
    अच्छा सन्देश दीपावली का ...

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    1. हार्दिक आभार श्रीमान नासवा जी .शुभ दीपावली

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    1. सहृदय साधुवाद आपका . दीपोत्सव की मंगलकामनाएं

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    1. सादर अभिनन्दन माननीया संगीता जी . मंगलमय हो दीपोत्सव

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    1. हार्दिक धन्यवाद .श्रीमान कुलदीप ठाकुर जी .शुभ दीपावली

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  5. बहुत सार्थक अभिव्यक्ति...

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